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दिल्ली में अब ऐप से शराब की होगी बुकिंग, क्या हिमाचल में शिमला, मनाली और धर्मशाला में होनी चाहिए ऐसी व्‍यवस्‍था, आपकी क्‍या राय है

➤ दिल्ली में ऐप से शराब की ऑनलाइन बुकिंग शुरू, क्या हिमाचल के बड़े शहरों में भी होनी चाहिए ऐसी व्यवस्था
➤ शिमला, मनाली, धर्मशाला और सोलन जैसे पर्यटन व भीड़भाड़ वाले शहरों में उठ रहा सवाल
➤ पक्ष में भीड़ और पारदर्शिता के तर्क, विरोध में सामाजिक असर और उम्र सत्यापन की चिंता


शिमला। दिल्ली में ‘दिल्ली लिकर बुकिंग’ ऐप के जरिए शराब की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू होने के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या यहां के बड़े शहरों में ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए। दिल्ली में इस ऐप को दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीसीआईआईडीसी) ने लॉन्च किया है। इससे करीब 208 रिटेल स्टोर जुड़े हैं। ग्राहक ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान कर सकते हैं, लेकिन 48 घंटे के भीतर खुद दुकान पहुंचकर ऑर्डर लेना होगा। होम डिलीवरी की सुविधा नहीं है।

हिमाचल में फिलहाल ऐसी किसी व्यवस्था की जानकारी सामने नहीं आई है। प्रदेश में शराब के खुदरा ठेके हर साल ई-नीलामी के जरिए आवंटित होते हैं और वित्त वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति में यह प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है। आबकारी प्रशासन में ट्रैक एंड ट्रेस जैसी ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था की बात भी सामने आ चुकी है। ऐसे में डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ते प्रदेश में यह चर्चा स्वाभाविक मानी जा रही है कि बुकिंग भी ऑनलाइन क्यों न हो।

पक्ष में तर्क देने वालों का कहना है कि शिमला, मनाली और धर्मशाला जैसे शहरों में सीजन के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में ठेकों पर लगने वाली लंबी कतारें और ट्रैफिक का दबाव ऑनलाइन बुकिंग से कम हो सकता है। उनका तर्क है कि ऑनलाइन भुगतान से लेन-देन का रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और तय कीमत से ज्यादा वसूली जैसी शिकायतों पर रोक लग सकती है। दुकान से ही शराब मिलने की शर्त होने के कारण वे इसे नियंत्रित व्यवस्था बताते हैं।

विरोध में तर्क देने वालों का कहना है कि पहाड़ी राज्य में पहले से ही शराब और नशे को लेकर सामाजिक चिंता बनी हुई है। उनका मानना है कि ऐप से बुकिंग की आसान सुविधा युवाओं और कम उम्र के लोगों तक पहुंच बढ़ा सकती है, इसलिए उम्र के सत्यापन की सख्त व्यवस्था जरूरी होगी। साथ ही हिमाचल के कई इलाकों में इंटरनेट और नेटवर्क की समस्या रहती है, जिससे ऐप आधारित व्यवस्था हर जगह कारगर नहीं हो सकती। पर्यटकों के लिए 48 घंटे की समय सीमा और दुकान तक पहुंच भी व्यावहारिक सवाल खड़े कर सकती है।

एक बड़ा सवाल यह भी है कि जब दिल्ली की तरह होम डिलीवरी नहीं होगी और शराब लेने दुकान जाना ही पड़ेगा, तो ऑनलाइन बुकिंग से कतार और भीड़ में वास्तव में कितनी राहत मिलेगी। इसलिए जानकार मानते हैं कि इस तरह की किसी भी व्यवस्था पर फैसला लेने से पहले सामाजिक असर, राजस्व और निगरानी तीनों पहलुओं पर विचार जरूरी होगा। फिलहाल यह चर्चा आम लोगों के बीच की है और सरकार या आबकारी विभाग की ओर से ऐसे किसी प्रस्ताव पर कोई घोषणा नहीं हुई है।